News Updates

(Update 12 minutes ago)

क्या भारत ईमानदारी से प्रतियोगी परीक्षाएँ कराने की क्षमता खो चुका है?

पूर्व आईएएस अधिकारी वी एस पाण्डेय लिखते हैं इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि समस्या केवल किसी एक राज्य या एजेंसी तक सीमित नहीं है। यह एक संगठित उद्योग का रूप ले चुकी है जिसमें कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, परीक्षा केंद्र कर्मचारी, साइबर अपराधी और कई बार प्रभावशाली लोग भी शामिल पाए जाते हैं।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को पेपर लीक के आरोपों के कारण निरस्त किया जाना केवल एक परीक्षा का संकट नहीं है, बल्कि यह भारत की पूरी परीक्षा प्रणाली पर लगा गंभीर प्रश्नचिह्न है। लाखों विद्यार्थी वर्षों की मेहनत, मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और पारिवारिक अपेक्षाओं के साथ इन परीक्षाओं में बैठते हैं। लेकिन जब प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही बाजार में बिकने लगें, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर घूमने लगें, और बाद में परीक्षाएँ रद्द करनी पड़ें, तब यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि “मेहनत बनाम भ्रष्टाचार” की लड़ाई बन जाती है। हाल के घटनाक्रम में NEET-UG 2026 को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द किया गया है और जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हुई हैं।
भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं का दायरा अत्यंत विशाल है। हर वर्ष करोड़ों विद्यार्थी सरकारी नौकरियों, मेडिकल, इंजीनियरिंग, विश्वविद्यालय प्रवेश तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं में भाग लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में प्रश्नपत्र लीक की घटनाएँ इतनी सामान्य हो गई हैं कि अब ईमानदार परीक्षार्थी स्वयं को ठगा हुआ महसूस करने लगे हैं। 2019 से 2024 के बीच देश में कम से कम 65 बड़ी परीक्षाएँ पेपर लीक या परीक्षा अनियमितताओं से प्रभावित हुईं।
लाखों सपनों की कब्रगाह बन चुका है भारत का परीक्षा तंत्र। हर साल करोड़ों युवा रात-दिन एक करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं — कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, कोई सरकारी अफसर। लेकिन जब परीक्षा हॉल में बैठने से पहले ही प्रश्नपत्र व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर वायरल हो जाता है, तो उन सपनों का क्या होता है? यह केवल एक परीक्षा का निरस्त होना नहीं है — यह उस पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है जिस पर 140 करोड़ लोगों का भविष्य टिका है।
पेपर लीक की एक लंबी और शर्मनाक सूची है ।
भारत में पेपर लीक कोई नई घटना नहीं है। यह एक दशकों पुरानी बीमारी है जो हर बार नए रूप में सामने आती है।इसके कुछ उदाहरण –
NEET-UG 2024: 5 मई 2024 को देशभर में लगभग 24 लाख परीक्षार्थी बैठे। परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बिहार में 13 लोग गिरफ्तार हुए जिन्होंने प्रश्नपत्र खरीदा था। गुजरात के गोधरा में एक परीक्षा केंद्र पर धांधली पकड़ी गई। CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप हुआ। NTA के महानिदेशक को बर्खास्त किया गया।
UGC-NET जून 2024: 18 जून को परीक्षा हुई, 19 जून को रद्द। डार्कनेट पर प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि हुई।
UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2024: लगभग 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित। परीक्षा व्यापक लीक के बाद रद्द करनी पड़ी।
CBSE 2018: कक्षा 12 की अर्थशास्त्र और कक्षा 10 की गणित का प्रश्नपत्र लीक हुआ। लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।
SSC CGL 2017: स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की परीक्षा में लीक के आरोपों ने देशव्यापी प्रदर्शन और CBI जांच को जन्म दिया।
AIPMT 2015: सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक लीक के चलते पूरी परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया।
व्यापम घोटाला, मध्यप्रदेश (2013 और आगे): दर्जनों परीक्षाओं में सुनियोजित धोखाधड़ी। इससे जुड़े कई व्यक्तियों की रहस्यमय मौतें। अब तक का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला माना जाता है।
REET 2021, राजस्थान: शिक्षक भर्ती परीक्षा में सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता से बड़े पैमाने पर लीक।
BPSC 67वीं परीक्षा 2022, बिहार: प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल, परीक्षा रद्द।
West Bengal SSC घोटाला: शिक्षक भर्ती में पैसे लेकर नौकरी देने और OMR शीट से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप।
यह सूची यहीं समाप्त नहीं होती। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र — हर राज्य में यही कहानी दोहराई गई है।
इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि समस्या केवल किसी एक राज्य या एजेंसी तक सीमित नहीं है। यह एक संगठित उद्योग का रूप ले चुकी है जिसमें कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, परीक्षा केंद्र कर्मचारी, साइबर अपराधी और कई बार प्रभावशाली लोग भी शामिल पाए जाते हैं।
सबसे दुखद पक्ष यह है कि हर बार सजा विद्यार्थियों को मिलती है। कोई छात्र दो-दो वर्ष ड्रॉप लेकर तैयारी करता है, कोई गरीब परिवार खेत बेचकर कोचिंग की फीस देता है, कोई छात्र मानसिक दबाव में अवसाद तक पहुँच जाता है। लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद वही छात्र फिर से महीनों तैयारी करने को मजबूर हो जाता है। परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह का अर्थ है कि पूरी मेरिट व्यवस्था पर जनता का भरोसा टूटना।
सवाल यह है कि आखिर भारत जैसी तकनीकी शक्ति रखने वाला देश सुरक्षित परीक्षा प्रणाली क्यों नहीं बना पा रहा? इसका सबसे बड़ा कारण है भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क।ऐसा इस लिए है क्योंकि स्पष्ट रूप से देश की प्रशासनिक व्यवस्था ने एक प्रकार से भ्रष्टाचार को आत्मसात सा कर लिया हो और जब देशमें सर्वत्र भ्रष्टाचार व्याप्त हो तो परीक्षाएँ कैसे साफ़ सुथरी रह सकती हैं । जरा सोंचे कि जब बिना रिश्वत या सिफारिश के शायद ही किसी सरकारी दफ्तर में काम होता है और पूरा प्रशासनिक प्रणाली भ्रष्टाचार से ग्रसित हो तो वही व्यवस्था इम्तहान कैसे ईमानदारी से करा पाने में सक्षम हो सकती है । सर्वत्र व्याप्त बेईमानी ही इस स्थिति के लिए ज़िम्मेदार है और यह भी यथार्थ है कि भ्रष्टाचारियों को शायद ही यह व्यवस्था दंडित करने में रुचि रखती ही नहीं और इसी कारण भ्रष्टाचार के मामलों में वर्षों तक जाँच चलती रहती है लेकिन दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलती।
भारत की युवा शक्ति उसकी सबसे बड़ी पूँजी है। यदि मेहनत करने वाला छात्र यह महसूस करने लगे कि सफलता प्रतिभा से नहीं बल्कि “लीक सिस्टम” से मिलती है, तो यह लोकतंत्र और समाज दोनों के लिए खतरनाक संकेत है। प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय चरित्र का प्रश्न है।
अब समय आ गया है कि सरकार, न्यायपालिका, शिक्षा संस्थाएँ और समाज मिलकर यह सुनिश्चित करें कि परीक्षा केंद्रों में बैठा छात्र यह विश्वास लेकर उत्तर पुस्तिका भरे कि उसका भविष्य उसकी मेहनत तय करेगी, किसी माफिया का व्हाट्सऐप ग्रुप नहीं।
क्या भारत ईमानदार परीक्षा की उम्मीद खो चुका है? नहीं — लेकिन यह उम्मीद तभी जीवित रहेगी जब व्यवस्था केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर बदले। हर रद्द परीक्षा के पीछे लाखों छात्रों के महीनों की मेहनत, माता-पिता की बचत और परिवारों के सपने होते हैं। यह भ्रष्टाचार केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के विश्वास का हनन है।जब तक सम्पूर्ण प्रशासनिक तंत्र को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति पैदा नहीं होगी और भ्रष्टाचार रूपी दानव का वध नहीं किया जाएगा तब तक इसी प्रकार से प्रश्न पत्र लीक होते रहेंगे और परीक्षाएं निरस्त की जाती रहेंगी और देश की युवा पीढ़ी को भ्रष्टाचारियों के कुकर्मों का खामियाजा दुर्भाग्य से भुगतने के लिए मजबूर होना पड़ेगा ।
(विजय शंकर पाण्डेय भारत सरकार के पूर्व सचिव हैं)

Share via

Get Newsletter

Most Shared

Advertisement